यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4) द्वारा सोमवार को बल्लभगढ पंचायत भवन से एक रोडशो का आयोजन किया गया। सभी आंदोलनकारी मेन मार्केट में होते हुए एसडीएम कार्यालय तक पैदल पहुंचे। इस विरोध प्रदर्शन में ब्राह्मण वैश्य, क्षत्रिय राजपूत समाज व सवर्ण सेना सहित कई सामाजिक संगठनो ने हिस्सा लिया। जिसके बाद एसडीएम कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर एसडीएम और डीसी के माध्यम से देश प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम से ज्ञापन भी सोंपे गए।
रोडशो के दौरान सवर्ण सेना प्रमुख दीपक गौड ने केंद्र सरकार को सवर्ण समाज विरोधी बताते हुए कहा कि आए दिन बीजेपी वोट बैंक की राजनीति में फंसकर हिंदू समाज और सनातन संस्कृति को तोड़ने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई किसी एससी-एसटी या ओबीसी वर्ग से नही है, बल्कि हमारे सवर्ण समाज के कुलद्रोही नेताओ से है, जो जाति के नाम पर वोट हमारा लेते हैं और कानून दूसरे वर्गों के लिए बनाते हैं। अगर इन स्वार्थी नेताओ ने अपनी आवाज उठाकर सरकार से यह यूजीसी बिल वापस नहीं कराया तो आने वाले चुनाव में इनका खुलकर विरोध किया जाएगा। साथ ही ऐसे कुलद्रोही विधायकों और सांसदो का घेराव भी किया जाएगा और सवर्ण समाज समन्वय समिति(S-4) का गठन राष्ट्रीय स्तर पर हो चुका है, जिसके द्वारा आगामी 8 मार्च को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में देश भर के सामाजिक संगठनों से समन्वय करके एक बडे आंदोलन का शंखनाद हो गया है, आगे की रणनीति वही से तय की जाएगी। इस कार्यक्रम में दीपक गौड़ के अलावा भगवान दास गोयल, ब्रिज मोहन बातिश, सवर्ण सिंह, राहुल गर्ग, राकेश भारद्वाज, राजेश गोयल, अरविन्द तिवारी, पवन गर्ग, मनोज अग्रवाल, जितेंदर बंसल, अनुज शर्मा, अवधेश शर्मा, इंद्रजीत पाराशर, विष्णु पाठक, शिवकुमार शर्मा, राधे पंडित, डीके शर्मा, गौरव भाटी, योगेश चौहान, अजय शर्मा(भैयाजी), लोकेंद्र राजपूत, राजकुमार राजपूत, राजबाला शर्मा, सतबीर शर्मा, राकेश शर्मा सहित शहर के हजारों गणमान्य लोगो ने हिस्सा लिया।
9811117634
ज्ञापन
प्रेषक :
सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)
जिला फरीदाबाद, हरियाणा
दिनांक : 16 फरवरी 2026
प्रति,
माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी
प्रधानमंत्री
भारत सरकार
माध्यम :
माननीय जिला उपायुक्त महोदय
जिला फरीदाबाद, हरियाणा।
विषय :
यू.जी.सी. अधिसूचना/विनियम संख्या 01/2026 की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार एवंउसेनिरस्त किए जानेकेसंबंध में।
महोदय,
यह प्रतिनिधि ज्ञापन भारत के संविधान मेंनिहित समानता, विधि का शासन (Rule of Law), योग्यता आधारित अवसर
तथा सामाजिक समरसता के मूलभूत सिद्धांतों केसंरक्षण हेतुप्रस्तुत किया जा रहा है।
हम, समस्त सामान्य वर्ग (सवर्णसमाज) के नागरिक, यह स्पष्ट करना चाहतेहैंकि हमारा यह निवेदन किसी भी संवैधानिक
रूप से ऐसी नीतियों के विरुद्ध है जो संविधान के मूल ढाँचे (Basic
Structure) तथा न्यायालय द्वारा स्थापित सीमाओं का अतिक्रमण करती प्रतीत होती हैं।
दिनांक 13 जनवरी 2026 सेप्रभावी यू.जी.सी. अधिसूचना/विनियम 01/2026 के परिणामस्वरूप उत्पन्न होनेवाली
परिस्थितियाँनिम्नलिखित संवैधानिक प्रश्नों को जन्म देती हैं—
1. अनुच्छेद 14 का उल्लंघन – समानता केअधिकार पर आघात
माननीय सर्वोच्च न्यायालय नेE.P. Royappa बनाम State of Tamil Nadu एवं Maneka Gandhi बनाम Union of
India मामलों मेंयह स्पष्ट किया हैकि मनमाना वर्गीकरण (Arbitrariness) स्वयंमेंही अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
यू.जी.सी. विनियम 01/2026 केअंतर्गत किया गया वर्गीकरण—
• तर्कसंगत भेद (Intelligible Differentia)
• तथा उद्देश्य सेतार्किक संबंध (Rational Nexus)
की कसौटी पर खरा उतरता प्रतीत नहीं होता।
2. अनुच्छेद 15 एवं 16 की सीमाओं का अतिक्रमण
माननीय सर्वोच्च न्यायालय नेIndra Sawhney बनाम Union of India (1992) मेंस्पष्ट रूप सेकहा हैकि—
• आरक्षण कोई असीमित अधिकार नहीं है
• तथा Merit का पूर्णअपवर्जन संविधान सम्मत नहीं हो सकता
उक्त विनियम उच्च शिक्षा संस्थानों मेंयोग्यता आधारित चयन प्रक्रिया को गंभीर रूप सेप्रभावित करता है, जो अनुच्छेद
15(1) एवं 16(1) की आत्मा केविपरीत है।
3. शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता पर प्रतिकू ल प्रभाव
State of Tamil Nadu v. Adhiyaman Educational & Research Institute तथा T.M.A. Pai Foundation v.
State of Karnataka मेंमाननीय न्यायालय नेशैक्षणिक संस्थानों की अकादमिक स्वायत्तता को संरक्षित किया है।
यू.जी.सी. अधिसूचना 01/2026—
• विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता
• शैक्षणिक उत्कृष्टता
• शोध एवंनवाचार
पर प्रतिकू ल प्रभाव डालती प्रतीत होती है।
4. संविधान केमूल ढाँचे (Basic Structure) सेअसंगति
Kesavananda Bharati बनाम State of Kerala के ऐतिहासिक निर्णय मेंयह प्रतिपादित किया गया कि—
समानता, न्याय एवंविधि का शासन संविधान केमूल ढाँचेका हिस्सा हैं।
ऐसी कोई भी नीति जो समाज के एक वर्गको संस्थागत रूप सेवंचित या कलंकित करती हो, संविधान के मूल ढाँचेके
प्रतिकू ल मानी जाएगी।
5. सामाजिक समरसता एवंसार्वजनिक व्यवस्था पर संभावित प्रभाव
माननीय सर्वोच्च न्यायालय नेसमय-समय पर यह स्वीकार किया हैकि शिक्षा नीति का सीधा संबंध सार्वजनिक व्यवस्थाएवंराष्ट्रीय एकता सेहै।
वर्तमान विनियम—
• सामाजिक विभाजन
• युवा वर्गमेंअसंतोष• एवंदीर्घकालीन सामाजिक अशांति
को बढ़ावा देनेकी क्षमता रखता है, जो अनुच्छेद 19(2) केअंतर्गत राज्य के दायित्वों केविपरीत है।
अतः संवैधानिक विनम्र निवेदन
उपरोक्त तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित विधिक सिद्धांतों के आलोक मेंहम यह
सादर निवेदन करतेहैंकि—
1. यू.जी.सी. अधिसूचना/विनियम 01/2026 को
2. संवैधानिक वैधता, सामाजिक समरसता एवंशैक्षणिक गुणवत्ता की कसौटी पर
3. तत्काल प्रभाव सेनिरस्त किया जाए अथवा व्यापक पुनर्विचार हेतुस्थगित किया जाए
ताकि भारत का उच्च शिक्षा तंत्र समान अवसर, योग्यता एवंराष्ट्रीय एकता केसंवैधानिक आदर्शों केअनुरूप बना रहे।
आपकेसंवैधानिक विवेक एवंन्यायपूर्णनिर्णय की अपेक्षा सहित।
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